UPSC परीक्षा का पाठ्य विवरण (Syllabus):

अर्हक प्रश्न पत्र भारतीय भाषा और अंग्रेजी
  • इस प्रश्न पत्र का उद्देश्य अंग्रेजी तथा संबंधित भारतीय भाषा में अपने विचारों को स्पष्ट तथा सही रूप में प्रकट करना तथा गंभीर तर्कपूर्ण गद्य को पढ़ने और समझने में उम्मीदवार की योग्यता की परीक्षा करना है। प्रश्न पत्रों का स्वरूप आमतौर पर निम्न प्रकार का होगा :
    • दिए गए गद्यांशों को समझना
    • संक्षेपण
    • शब्द प्रयोग तथा शब्द भंडार
    • लघु निबंध
  • भारतीय भाषाएं :-
    • दिए गए गद्यांशों को समझना
    • संक्षेपण
    • शब्द प्रयोग तथा शब्द भंडार
    • लघु निबंध
    • अंग्रेजी से भारतीय भाषा तथा भारतीय भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद
  • टिप्पणी:
    • 1. भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के प्रश्न पत्र मैट्रिकुलेशन या समकक्ष स्तर के होंगे, जिनमें केवल अर्हता प्राप्त करनी है। इन प्रश्न पत्रों में प्राप्तांक योग्यता क्रम के निर्धारण में नहीं गिने जाते हैं।
    • 2. अंग्रेजी तथा भारतीय भाषाओं के प्रश्न पत्रों के उत्तर उम्मीदवारों को अंग्रेजी तथा संबंधित भारतीय भाषा में देने होते हैं। (अनुवाद को छोड़कर)।
प्रश्न पत्र - I निबंध
  • उम्मीदवार को विविध विषयों पर निबंध लिखना होता है।
  • प्रत्येक निबंध 125 अंको का होगा , जिसके लिए शब्द सीमा 1000-1200 शब्दों की होती है ।
  • उनसे अपेक्षा की जाएगी कि वे निबंध के विषय पर ही केन्द्रित रहें तथा अपने विचारों को सुनियोजित रूप से व्यक्त करें और संक्षेप में लिखें।
  • प्रभावी और सटीक अभिव्यक्ति के लिए अंक प्रदान किए जाते हैं।
प्रश्न पत्र - II सामान्य अध्ययन - I भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज
  • भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल हैं ।
  • 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, विषय।
  • स्वतंत्रता संग्राम - इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।
  • स्वतंत्रता के पश्चात देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।
  • विश्व के इतिहास में 18वीं सदी की घटनाएं यथा औ‌द्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनः सीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन शास्त्र जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।
  • भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं, भारत की विविधता ।
  • महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं सम्बद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएं और उनके रक्षोपाय।
  • भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव।
  • सामाजिक सशक्तीकरण, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्म-निरपेक्षता।
  • विश्व के भौतिक-भूगोल की मुख्य विशेषताएं।
  • विश्वभर के मुख्य प्राकृतिक संसाधनों का वितरण (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को शामिल करते हुए), विश्व (भारत सहित) के विभिन्न भागों में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के उद्योगों को स्थापित करने के लिए जिम्मेदार कारक।
  • भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएं, भूगोलीय विशेषताएं और उनके स्थान-अति महत्वपूर्ण भूगोलीय विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणि-जगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।
प्रश्न पत्र III सामान्य अध्ययन-II शासन व्यवस्था, संविधान, शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
  • भारतीय संविधान-ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
  • संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढांचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियां, स्थानीय स्तर पर शाक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियां।
  • विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।
  • भारतीय संवैधानिक योजना की अन्य देशों के साथ तुलना।
  • संसद और राज्य विधायिका संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियां एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।
  • कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य - सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएं।
  • विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियां, कार्य और उत्तरदायित्व।
  • सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
  • सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
  • विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।
  • केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन, इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
  • गरीबी और भूख से संबंधित विषय ।
  • शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।
  • लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।
  • भारत एवं इसके पड़ोसी-संबंध।
  • द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार
  • भारत के हितों, भारतीय परिदृश्य पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव।
  • महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएं और मंच उनकी संरचना, अधिदेश।
प्रश्न पत्र IV सामान्य अध्ययन - III प्रौ‌द्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय ।
  • समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
  • सरकारी बजट।
  • मुख्य फसलें देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली-कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएं; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौ‌द्योगिकी।
  • प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली-उद्देश्य, कार्य, सीमाएं, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषयः प्रौ‌द्योगिकी मिशन; पशु-पालन संबंधी अर्थशास्त्र।
  • भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उ‌द्योग कार्यक्षेत्र एवं महत्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएं, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन ।
  • भारत में भूमि सुधार।
  • उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औ‌द्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औ‌द्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।
  • बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
  • निवेश मॉडल ।
  • विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।
  • विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; देशज रूप से प्रौ‌द्योगिकी का विकास और नई प्रौ‌द्योगिकी का विकास।
  • सूचना प्रौ‌द्योगिकी, अंतरिक्ष, कम्प्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौ‌द्धिक सम्पदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता।
  • संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
  • आपदा और आपदा प्रबंधन ।
  • विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।
  • आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्वों की भूमिका।
  • संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां एवं उनका प्रबंधन संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।
  • विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएं तथा उनके अधिदेश।
प्रश्न पत्र V सामान्य अध्ययन - IV नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि।
  • इस प्रश्न-पत्र में ऐसे प्रश्न शामिल होंगे जो सार्वजनिक जीवन में उम्मीदवारों की सत्यनिष्ठा, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति उनकी अभिवृत्ति तथा उनके दृष्टिकोण तथा समाज से आचार-व्यवहार में विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी मनोवृत्ति का परीक्षण करेंगे। इन आयामों का निर्धारण करने के लिए प्रश्न-पत्रों में किसी मामले के अध्ययन (केस स्टडी) का माध्यम भी चुना जा सकता है। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।
    • नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र। मानवीय मूल्य महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।
    • अभिवृत्तिः सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरुचिः सामाजिक प्रभाव और धारणा।
    • सिविल सेवा के लिए अभिरूचि तथा बुनियादी मूल्य, सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर- तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमजोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।
    • भावनात्मक समझः अवधारणाएं तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।
    • भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।
    • लोक प्रशासनों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएं; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएं तथा दुविधाएं, नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतर्रात्मा; शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्देः कारपोरेट शासन व्यवस्था।
    • शासन व्यवस्था में ईमानदारीः लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार, सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियां।
  • उपर्युक्त विषयों पर मामला संबंधी अध्ययन (केस स्टडी)।
प्रश्न पत्र VI वैकल्पिक विषय प्रश्न पत्र I
  • उम्मीदवार निम्नलिखित वैकल्पिक विषयों की सूची में से किसी भी वैकल्पिक विषय का चयन कर सकते हैं:
    • कृषि विज्ञान
    • पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान
    • नृविज्ञान
    • वनस्पति विज्ञान
    • रसायन विज्ञान
    • सिविल इंजीनियरी
    • वाणिज्य शास्त्र तथा लेखा विधि
    • अर्थशास्त्र
    • विद्युत इंजीनियरी
    • भूगोल
    • भू-विज्ञान
    • इतिहास
    • विधि
    • प्रबंधन
    • गणित
    • यांत्रिक इंजीनियरी
    • चिकित्सा विज्ञान
    • दर्शन शास्त्र
    • भौतिकी
    • राजनीति विज्ञान तथा अन्तर्राष्ट्रीय संबंध
    • मनोविज्ञान
    • लोक प्रशासन
    • समाज शास्त्र
    • सांख्यिकी
    • प्राणि विज्ञान
    • निम्नलिखित भाषाओं में से किसी एक भाषा का साहित्यः
      • असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उडिया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगू, उर्दू और अंग्रेजी।
प्रश्न पत्र VI वैकल्पिक विषय प्रश्न पत्र II
  • वैकल्पिक विषय

निबंध:

UPSC में अधिक अंक प्राप्त करने हेतु निबंध कैसे लिखें ?

  • निबंध मूल्रू रूप से संपूर्ण व्यक्तित्व का परीक्षण है और इससे अभ्यर्थियों की संवेदना एवं सोच का पता चलता है। संघ लोक सेवा आयोग के निबंधों की प्रवृत्ति रचनात्मक और कल्पनात्मक रही है।
  • अभ्यर्थियों से उम्मीद की जाती है, कि वे दिये गए विषय की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए अपने रचनात्मक और कल्पनात्मक कौशल का प्रदर्शन करें, न कि तथ्यों का एक विशाल महासागर बना दें। निबंध को नीरस और अरुचिकर बनाने की बजाय, इसे सुगम और रोचक बनाने का प्रयास करें।
  • निर्धारित शब्द-सीमा में एक स्पष्ट और संक्षिप्त भाषा शैली का उपयोग करते हुए अपने तर्कों का समर्थन करने के लिए प्रासंगिक उदाहरणों और आंकड़ों का प्रयोग करें।
  • निबंध लेखन में चुनौतियां:
    • निबंध की तैयारी कैसे की जाए ?
    • इसके लिए कौन सी किताब पढ़ी जाए?
    • निबंध को कैसे सहज और रोचक बनाया जाए ?
    • निबंध में अधिकतम अंक कैसे प्राप्त किया जाए ?
    • कम-से-कम शब्दों में पूरे विषय को स्पष्ट कैसे किया जाए?
    • रचनात्मक और कल्पनात्मक कौशल का विकास कैसे किया जाए ?
  • निबंध को उत्कृष्ट बनाने के प्रभावी उपाय:
    • निरंतर कम-से-कम दो दिनों में एक निबंध निश्चित रूप से लिखें।
    • अधिक से अधिक विषयों पर निर्धारित समय और तय शब्द-सीमा में निबंध लेखन का अभ्यास करें विशेषकर, उन विषयों पर जिसे सिविल सेवा परीक्षा में अब तक पूछा जा चुका है।
    • कुछ प्रसिद्ध निबंधकारों के निबंध पढ़ें और समझने की कोशिश करें कि विषय को कितने आयामों में बाँटा है साथ ही लेखक के क्या मनोभाव रहे हैं ?
    • कुछ प्रसिद्ध महापुरुषों के कथन, शायरी, कविता का भी एक संग्रह बना लें, विशेषकर, गरीबी, न्याय, महिला, विज्ञान, धर्म, भ्रष्टाचार से जुड़े विषय संबंधी।
    • निबंध लिखते समय विचारधारा चाहे जो भी हो, बस जनसाधारण के विरोध वाली और किसी लिंग, जाति व धर्म के प्रति दुराग्रहपूर्ण नहीं होनी चाहिये।
    • यदि सरकारी नीतियों के विरोध की बात हो तो उचित विरोध किया जा सकता है, लेकिन उसके संभावित समाधान हेतु उचित तर्क होने चाहिए केवल विरोध करने के लिये विरोध नहीं किया जाना चाहिए।

Interview की तैयारी कैसे करें ?

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के तहत होने वाली इंटरव्यू प्रक्रिया या साक्षात्कार प्रक्रिया को "पर्सनैलिटी टेस्ट" कहा जाता है। यह इस परीक्षा का अंतिम चरण होता है और इसे उत्तीर्ण करने के बाद ही उम्मीदवार को भारतीय प्रशासनिक सेवाओं (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए चुना जाता है।

UPSC Interview/साक्षात्कार का उद्देश्य :

UPSC का Interview/साक्षात्कार एक इंटरव्यू बोर्ड जिसमें सामान्यतः एक अध्यक्ष और अनुभवी प्रशासक, शिक्षाविद, और विषय विशेषज्ज्ञों जैसे 4-5 सदस्य होते हैं; के तहत 20 से 45 मिनट तक का होता है। चूँकि UPSC इंटरव्यू न केवल आपकी ज्ञान की परीक्षा है, बल्कि यह यह भी देखता है कि आप एक जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासक बनने के लिए उपयुक्त हैं या नहीं। अतः इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  • उम्मीदवार की समग्र व्यक्तित्व का आकलन करना, जैसे कि उनके दृष्टिकोण, सोचने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति, नेतृत्व कौशल, समस्या समाधान क्षमता इत्यादि।
  • साथ ही इस बात का परीक्षण करना, कि उम्मीदवार सिविल सेवा की जिम्मेदारियों को संभालने के योग्य हैं या नहीं।

UPSC Interview/साक्षात्कार के समय पूछे जाने वाले कुछ सामान्य प्रश्नों के प्रकार:

DAF (Detailed Application Form) पर आधारित: आपके शैक्षणिक बैकग्राउंड, कार्य अनुभव, हॉबीज़, रुचियों और स्थान विशेष से सम्बंधित प्रश्न ।
सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं से संबंधित प्रश्न।।
परिस्थितिजन्य प्रश्न: आपके व्यवहार, दृष्टिकोण, और निर्णय लेने की क्षमता को जांचने के लिए।।
सामाजिक और नैतिक मुद्दे: ईमानदारी, जवाबदेही, और नैतिकता पर आधारित सवाल।

UPSC सिविल सेवा इंटरव्यू की तैयारी के लिए नीचे दिए गए चरणों और सुझावों का पालन किया जा सकता है:

  • विस्तृत DAF एनालिसिस:
    • DAF (Detailed Application Form) में दी गई जानकारी का गहन विश्लेषण करें।
    • आपके शौक (Hobbies), शिक्षा, कार्य अनुभव, निवास स्थान और भाषा से संबंधित सवाल पूछे जा सकते हैं।
    • अतः प्रत्येक बिंदु पर अपनी गहरी समझ और आत्मविश्वास रखें।
  • करंट अफेयर्स पर पकड़:
    • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे: दैनिक समाचार पत्र (जैसे, 'द हिंदू' या 'इंडियन एक्सप्रेस') पढ़ें।
    • समसामयिक मुद्दों की गहरी समझ: पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र, और राजनीति जैसे विषयों पर अपडेट रहें।
    • सरकारी योजनाएं और नीतियां: इनसे जुड़े प्रभावों और चुनौतियों पर विचार करें।
  • मॉक इंटरव्यू का अभ्यास:
    • अच्छे कोचिंग संस्थानों या अपने मित्र समूह के साथ मॉक इंटरव्यू का अभ्यास करें।
    • मॉक इंटरव्यू से आपकी कमियों का पता चलता है और सुधार करने में मदद मिलती है।
  • बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास:
    • सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज: शारीरिक मुद्रा, आंखों के संपर्क और हाव-भाव पर ध्यान दें।
    • आत्मविश्वास बनाए रखें, लेकिन अति आत्मविश्वास से बचें।
  • व्यक्तित्व विकास:
    • सिविल सेवा का इंटरव्यू आपकी व्यक्तित्व और दृष्टिकोण (दृष्टिकोण) की परीक्षा है।
    • सही दृष्टिकोण: नीतिगत, संतुलित और तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
    • समस्या समाधान कौशल: प्रत्येक प्रश्न का समाधान-आधारित उत्तर दें।
  • सामान्य ज्ञान और वैकल्पिक विषय:
    • सामान्य ज्ञान (GS) और वैकल्पिक विषयों से जुड़े मुख्य मुद्दों को दोहराएं।
    • वैकल्पिक विषय के महत्वपूर्ण पहलुओं की अच्छी पकड़ रखें।
  • भाषा पर ध्यान दें:
    • आप जिस भाषा में इंटरव्यू देने जा रहे हैं, उस भाषा में शुद्धता और स्पष्टता होनी चाहिए।
    • साथ ही उत्तर सरल और सहज रखें।
  • आत्ममूल्यांकन:
    • खुद से सवाल पूछें:
    • "मैंने सिविल सेवा क्यों चुनी?"
    • "मेरे क्षेत्र या राज्य की मुख्य समस्याएं क्या हैं?"
    • "मेरा योगदान समाज को कैसे लाभ पहुंचा सकता है?"
  • गहरी समझ और विनम्रता:
    • अपने उत्तर में स्पष्टता और संतुलन (नकारात्मक/सकारात्मक) रखें।
    • यदि किसी प्रश्न का उत्तर नहीं पता, तो विनम्रतापूर्वक स्वीकार करें।
  • कुछ जरूरी विषय:
    • संविधान और शासन: संविधान के मुख्य अनुच्छेद और प्रावधान।
    • आर्थिक नीतियां और योजनाएं: हाल की आर्थिक सुधार और सरकारी योजनाओं की जानकारी।
    • पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन: पर्यावरणीय समस्याएं और समाधान।
    • समाज और संस्कृति: भारत की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर।
  • स्वास्थ्य और मनोबल:
    • यथोचित नींद लें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
    • योग और ध्यान के माध्यम से अपने मनोबल मजबूत बनाए रखें।
  • साक्षात्कार बोर्ड का दृष्टिकोण समझें:
    • बोर्ड सदस्य आपकी तार्किक क्षमता, समस्याओं का समाधान करने की क्षमता, और सामाजिक संवेदनशीलता को परखते हैं।
    • सटीकता और विनम्रता का संतुलन बनाए रखें।